कल की याद .......
वो चाय की चुस्की..... वो रम का स्वाद ..... वो सुट्टे का धुवा.... वो झूले का आराम ... वो झरने का बहता पानी.... वो पख्शियो की चचाहट ...वो लंगुरो का कूदना फुदकना ... वो पहाडो पे सूरज की किरने .... वो जलती हुई आग.... वो यारो की महफ़िल.... वो रपलिंग.....वो खिले हुए फूल... वो लम्बे लम्बे पेड़.... वो तिरछी राहे... वो ताज़ी हवा के झौके... वो जोइंट का नशा ....वो घर जैसे खाने का मजा ...वो सकून की तलाश .... वो शांत सुबह... वो रात की सर्दी... वो तरह तरह के cottages .... वो टेंट कालोनी का लूक्स ... वो tree हाउस से साईट view ... वो बुल्ल्ट पे हिल्स की तफरी ....वो लोगो का घुर घुर के देखना.... वो tunnel में गूंजती डुग डुग डुग की आवाज़..... वो वाटर फाल के निचे बुल्ल्ट पे फोटो.... वो १०००+ किलो मीटर ......वो १५+ बुलेटियर ..... वो ३ दिन.... हम्हे याद आयेंगे ... हम्हे याद आयेंगे.............
आज का सच .....
अब वही अलार्म वाली सुबह.....फिर वही ऑफिस.... वही पन्ट्री की डिप डिप वाली चाय.... वही फीकी व्हिस्की... वही नाले का बहता हुआ बदबूदार पानी..... वही ट्राफिक का शोर...वही पार्किंग का झोल.... वही रात की गर्मी... वही polluted हवा .... वही ऑफिस का खाना.... वही पोलिटिक्स का झमेला... वही टैक्स और सेविंगस की पुरानी दौड़.....वही तन्हाई...वही भीड़ में रहने वाले हम और तुम.... फिर भी... हम खुश है.....
क्योंकि....
क्योंकि.....
हम बुलेटियर!!!! है.........
वो चाय की चुस्की..... वो रम का स्वाद ..... वो सुट्टे का धुवा.... वो झूले का आराम ... वो झरने का बहता पानी.... वो पख्शियो की चचाहट ...वो लंगुरो का कूदना फुदकना ... वो पहाडो पे सूरज की किरने .... वो जलती हुई आग.... वो यारो की महफ़िल.... वो रपलिंग.....वो खिले हुए फूल... वो लम्बे लम्बे पेड़.... वो तिरछी राहे... वो ताज़ी हवा के झौके... वो जोइंट का नशा ....वो घर जैसे खाने का मजा ...वो सकून की तलाश .... वो शांत सुबह... वो रात की सर्दी... वो तरह तरह के cottages .... वो टेंट कालोनी का लूक्स ... वो tree हाउस से साईट view ... वो बुल्ल्ट पे हिल्स की तफरी ....वो लोगो का घुर घुर के देखना.... वो tunnel में गूंजती डुग डुग डुग की आवाज़..... वो वाटर फाल के निचे बुल्ल्ट पे फोटो.... वो १०००+ किलो मीटर ......वो १५+ बुलेटियर ..... वो ३ दिन.... हम्हे याद आयेंगे ... हम्हे याद आयेंगे.............
आज का सच .....
अब वही अलार्म वाली सुबह.....फिर वही ऑफिस.... वही पन्ट्री की डिप डिप वाली चाय.... वही फीकी व्हिस्की... वही नाले का बहता हुआ बदबूदार पानी..... वही ट्राफिक का शोर...वही पार्किंग का झोल.... वही रात की गर्मी... वही polluted हवा .... वही ऑफिस का खाना.... वही पोलिटिक्स का झमेला... वही टैक्स और सेविंगस की पुरानी दौड़.....वही तन्हाई...वही भीड़ में रहने वाले हम और तुम.... फिर भी... हम खुश है.....
क्योंकि....क्योंकि.....
हम बुलेटियर!!!! है.........
Nice presentation buddy :-)
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