Thursday, July 19, 2012

21-Jul-2012 (Saturday)







= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = इज्ज़ते....शोहरतें....उल्फतें....चाहतें........सब कुछ इस दुनिया में रहता नहीं.........
इज्ज़ते....शोहरतें....उल्फतें....चाहतें........सब कुछ इस दुनिया में रहता नहीं.........

आज मैं हूँ जहाँ.........कल कोई और था...........यह भी एक दौर है........वो भी एक दौर था.!!!!!!.......= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = =

21-Jul-2012 (Saturday)
आज से ठीक 5 साल पहले यानी की 21 -जुलाई -2007 (शनिवार) 00:00 hours को मैंने घर (जयपुर) छोड दिया था (भाग गया था)| कुछ उमींदे, कुछ सपने, थोडा सा जूनून और बहुत सारे डर के साथ|

आज सोचता हूँ तो क्या था मेरे साथ, 1 किताबो का बक्सा, 1 झोला कपड़ो का, चंद कागज़ के टुकड़े (degrees  / certificates ), माता रानी (वैष्णो देवी) का आशीर्वाद, माँ की आँख के आंसू, और पिताजी का डेबिट कार्ड (INR 50K) |

वैसे तो मैं ना बहार की दुनिया से वाकिफ था...ना ही मेरे कंधो पे कोई जिम्मेदारी का बोझ था .... बस फिर भी निकल पड़ा था कुछ साबित करने... दुनिया को नहीं ... अपने आप को... अपनी नजरो से नज़र मिलाने को..... और आज 5 साल बाद मुझे ऐसा लगता है की कुछ हद तक उन उम्मीदों पे खरा उतरा हूँ, कुछ सपने पूरे कर पाया हूँ, कुछ डर कम हो गया है........

ð  इन 5 सालो में मुझे बहुत अच्छे अनुभव मिले, कुछ मीठे, कुछ खट्टे, तो कुछ कड़वे भी... पर यकीन ये भी हुआ की ये ही जीवन है और बस चलते जाना है.....हो सके तो बस मुस्कराते जाओ और दूसरो के चेहरों पे भी मुस्कराहट लाओ.....

ð   इन 5 सालो में मैं बहुत लोगो से मिला....और कुछ अच्छे, बहुत अच्छे साथी बने, कुछ मिले और फिर बिछड़ गए....और कुछ ना चाहते हुए भी दूर हो गए....पर यकीन ये हुआ की हर कोई हमारी जिंदगी में एक मकसद /वजह  से आता है...अगर आप उस वजह को ना समझ पाओ तो यह मान लो की आप उनकी जिंदगी में किसी मकसद से थे.........

ð  इन 5 सालो में मैंने बहुत सारे कर्म भी किये.... कुछ दिल से... कुछ दिमाग से... कुछ समझदारी के, कुछ चालाकी के, कुछ बेवकूफी के भी........कुछ का अच्छा फल मिला....कुछ का नहीं मिला.....पर यकीन ये भी हुआ की बस कर्म करना ही जरूरी है और यही हमारा लक्ष्य भी .........

ð   इन 5 सालो में बहुत ज्ञान की बाते सीखी.....कुछ किताबी, कुछ सामाजिक, कुछ आध्यात्मिक..फिर यह यकीन हुआ की ज्ञान जल से भी पतला है और हर तरफ है...बस जरूरत है उसे ग्रहण करने की........

ð  इन 5 सालो में बहुत गलतियाँ भी की....कुछ गलतियों को सुधार पाया ..तो कुछ को सुधारना अभी बाकी है....पर ये यकीन हुआ, की इंसान गलतियों का पुतला है......गलतियों से ही हम सीखते है........

ð  इन 5 सालो में रिश्तो की समझ और उन्हें निभाने की कला भी सीखी.... कुछ रिश्ते टूटे भी.....पर यकीन यह हुआ की रिश्ते झूठ के सहारे बन तो सकते है...पर निभते सिर्फ सच के भरोसे पे ही है.........

ð  इन 5 सालो में पैसा भी कमाया और उसकी अहमियत को भी कुछ हद तक समझ पाया.....पैसा कर्मो के उप्पर निर्भर करता है..... यह यकीन हुआ की पैसो के भी पैर होते है....उसकी इज्ज़त नहीं करोगे....कर्म नहीं करोगे तो वो चलता बनेगा..........और अब अपनी बात को यही खत्म करते हुए बस यही कहूँगा की

ð   इन 5 सालो में मैंने अपने शरीर (उसके अंग / अपने दिल / दिमाग / इन्द्रिया)  की अहमियत को भी कुछ हद तक समझा पाया हूँ.......आपका सबसे बड़ा साथी आपका अपना शरीर होता है....जिस दिन उसने साथ छोड दिया तो.......पर यह भी याद रखे की शरीर मिटने के बाद दुनिया आपको सिर्फ आपके कर्मो से याद रखती है!

Here, I would like to mention some names, their beliefs / support / love for me, without them I cant imagine, I would reach so far, or would able to understand and write such things !....

Gaurav Agarwal, Naveen Wadhwa, Rashi Wadhwa, Deepak Kumar, Jitendra Khanduja, Rachana Gupta, Harsha Mukhija, Amit Chhabra, Harsh Makker, Richa Bajaj and last but not the least "Pihu"

(P.S. All my friends / relatives have their own importance / space / respect / love in my heart).